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978-81-7597-691-7 5e0f2050e9b7fb1976837016 Atma Chintan Ki Kala (हिंदी) https://cdn1.storehippo.com/s/5d76112ff04e0a38c1aea158/ms.products/5e0f2050e9b7fb1976837016/images/5e201fb6d6d3652b41d03a90/5e201fa784a1312b3b41fbeb/webp/5e201fa784a1312b3b41fbeb.png

अपने मन को कोई किस प्रकार वश में करके उसे शान्त बना सकता है?

बाह्य आकर्षण वाले इस नाम-रूपात्मक जगत के कोलाहल से अपने मन को हटाकर उसे एक अद्भुत आतंरिक शांति-संपन्न और अनुपम आनंदमयी स्थिति में कैसे पहुँचाया जा सकता है?

भय और सीमाबद्धता के विवश भाव से हम कैसे मुक्त हो सकते हैं?

प्रस्तुत पुस्तक "आत्म-चिन्तन की कला" में स्वामी चिन्मयानंदजी उपर्युक्त सभी प्रश्नों का सटीक उत्तर दिया है - अपनी विशिष्ट काव्यात्मक शैली में | ये छः सरल सोपान प्रस्तुत करते है जिनका नियमित अभ्यास किया जाना चाहिए |

स्वामीजी क्रमशः एक एक सोपान उद्घाटित करते चलते हैं कि पहला आप शरीर को कैसे स्थिर करें, फिर अपना मंत्र-जप कैसे शुरू करें | यहाँ भी वे नाना मंत्रोच्चार बताते हैं | फिर, क्रमशः अपने में साक्षी भाव कैसे लाएँ और अंत में अपने नकारात्मक भावों से कैसे छुटकारा पाकर स्वयं ही उस परम शांति और आनंद को अनुभूत करें |

'हमारे मन के उस पार क्या है' - यह खोज ही आध्यात्मिक खोज है | और 'दिव्य परमानन्द कि सम्यक सुखद अनुभूति' ही जीवन का लक्ष है |

[ Art of Contemplation ]

A2015
in stock INR 55
Chinmaya Prakashan
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Atma Chintan Ki Kala (हिंदी)

SKU: A2015
₹55.0
Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 978-81-7597-691-7
Language: Hindi
Author: Swami Chinmayananda
Binding: Paperback
Tags:
  • Contemplation, Mindfulness, Yoga, Realisation

Description of product

अपने मन को कोई किस प्रकार वश में करके उसे शान्त बना सकता है?

बाह्य आकर्षण वाले इस नाम-रूपात्मक जगत के कोलाहल से अपने मन को हटाकर उसे एक अद्भुत आतंरिक शांति-संपन्न और अनुपम आनंदमयी स्थिति में कैसे पहुँचाया जा सकता है?

भय और सीमाबद्धता के विवश भाव से हम कैसे मुक्त हो सकते हैं?

प्रस्तुत पुस्तक "आत्म-चिन्तन की कला" में स्वामी चिन्मयानंदजी उपर्युक्त सभी प्रश्नों का सटीक उत्तर दिया है - अपनी विशिष्ट काव्यात्मक शैली में | ये छः सरल सोपान प्रस्तुत करते है जिनका नियमित अभ्यास किया जाना चाहिए |

स्वामीजी क्रमशः एक एक सोपान उद्घाटित करते चलते हैं कि पहला आप शरीर को कैसे स्थिर करें, फिर अपना मंत्र-जप कैसे शुरू करें | यहाँ भी वे नाना मंत्रोच्चार बताते हैं | फिर, क्रमशः अपने में साक्षी भाव कैसे लाएँ और अंत में अपने नकारात्मक भावों से कैसे छुटकारा पाकर स्वयं ही उस परम शांति और आनंद को अनुभूत करें |

'हमारे मन के उस पार क्या है' - यह खोज ही आध्यात्मिक खोज है | और 'दिव्य परमानन्द कि सम्यक सुखद अनुभूति' ही जीवन का लक्ष है |

[ Art of Contemplation ]

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