Hamsa Geeta

SKU: H2008
₹60.0
Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 978-81-7597-406-7
Language: Hindi
Author: Swami Tejomayananda
Binding: Paperback
Tags:
  • Geeta, Vedanta, Spirituality

Description of product

मानव मस्तिष्क सांसारिक उपलब्धियों में इतना उलझा रहता है कि ठोकरें खाते रहने पर भी संसार से स्वयं को पृथक नहीं कर पाता. इस प्रकार व्यस्त मस्तिष्क को ज्ञात ही नहीं होता कि उसेस कैसें छुटे. ऐसे`समय पर ईश्वर या प्रज्ञावान व्यवित ही उस प्रकाश दिखा सकता है.

ऐसी ही समस्या को लेकर सनतकुमार आदि सुष्टिकर्ता  ब्रह्मा जी ने स्वीकार किया कि वे उनका मन सुष्टि 

 निर्माण कार्य में निमग्न है,अति व्यस्त है, अतः उन्हें उपाय नहीं सूझ रहा है.तब परब्रह्म परमेश्वर स्वयं 'हंस'के रूप में प्रकट हुए और उन्होंने सत्य का ज्ञान कराया.श्रीमदभागवत का यह प्रसंग 'हंस गीता' कहलाता है

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