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वेदान्त के अपने गहन अध्ययन और मनन के फलस्वरूप स्वामीजी ने इन १८ श्लोकों में उपनिषादिक सिद्धान्त का सार प्रस्तुत किया है |

इसमें उन्होंने समस्त साधकों के संशयों को तर्कपूर्ण सिद्धान्तों के द्वारा स्पष्ट कर दिया है कि उनके बंधन का कारण क्या है तथा उन्हें मुक्ति किस प्रकार मिल सकती है |

J2003
in stockINR 50
Chinmaya Prakashan
1 1

Jnanasaar (हिंदी)

SKU: J2003
₹50
Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 978-81-7597-516-3
Language: Hindi
Author: Swami Tejomayananda
Binding: Paperback
Tags:
  • Spirituality, Spiritual Knowledge, Philosophy, Awakening

Description of product

वेदान्त के अपने गहन अध्ययन और मनन के फलस्वरूप स्वामीजी ने इन १८ श्लोकों में उपनिषादिक सिद्धान्त का सार प्रस्तुत किया है |

इसमें उन्होंने समस्त साधकों के संशयों को तर्कपूर्ण सिद्धान्तों के द्वारा स्पष्ट कर दिया है कि उनके बंधन का कारण क्या है तथा उन्हें मुक्ति किस प्रकार मिल सकती है |

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