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978-81-7597-385-5 5e0f209b9fae110881f21a15 Sri Avadhoot Ke Chaubis Guru - Ek Chintan (हिंदी) https://cdn1.storehippo.com/s/5d76112ff04e0a38c1aea158/ms.products/5e0f209b9fae110881f21a15/images/5e1c262fdf9fa34691c99f74/5e1c260109e1c04647c5057a/webp/5e1c260109e1c04647c5057a.png

परम पूज्य स्वामी पुरुषोत्तमानन्दजी के अनुसार राजा यदु व श्री अवधूत महाराज के मध्य हुआ संवाद संसारी साधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी है | इसलिए उन्होंने मार्गदर्शन की दृष्टी से इसकी विशद व सारगर्भित व्याख्या की है |

श्रुष्टि की समस्त चल-अचल वस्तुओं में भागवत तत्त्व अधिष्ठान रूप में विद्यमान है, इसलिए उन्हें गुरु रूप में स्वीकार कर उनसे सद्गुणों की शिक्षा लेना इस संवाद का मूल आशय है | 

स्वामीजी ने बहुत प्रेम पूर्वक साधकों की हितार्थ चौबीस गुरुओं से प्राप्त शिक्षा की सूक्ष्म विवेचना की है | उनके अनुसार एक-एक पाठ का अध्ययन व मनन साधकों को ईश्वर साक्षात्कार की प्राप्ति करा सकने में पूर्ण सक्षम है | 

S2022
in stockINR 55
Chinmaya Prakashan
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Sri Avadhoot Ke Chaubis Guru - Ek Chintan (हिंदी)

Sri Avadhoot Ke Chaubis Guru - Ek Chintan (हिंदी)

SKU: S2022
₹55
Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 978-81-7597-385-5
Language: Hindi
Author: Swami Purushottamananda
Binding: Paperback
Tags:
  • Spirituality, Spiritual Knowledge, Philosophy, Awakening

Description of product

परम पूज्य स्वामी पुरुषोत्तमानन्दजी के अनुसार राजा यदु व श्री अवधूत महाराज के मध्य हुआ संवाद संसारी साधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी है | इसलिए उन्होंने मार्गदर्शन की दृष्टी से इसकी विशद व सारगर्भित व्याख्या की है |

श्रुष्टि की समस्त चल-अचल वस्तुओं में भागवत तत्त्व अधिष्ठान रूप में विद्यमान है, इसलिए उन्हें गुरु रूप में स्वीकार कर उनसे सद्गुणों की शिक्षा लेना इस संवाद का मूल आशय है | 

स्वामीजी ने बहुत प्रेम पूर्वक साधकों की हितार्थ चौबीस गुरुओं से प्राप्त शिक्षा की सूक्ष्म विवेचना की है | उनके अनुसार एक-एक पाठ का अध्ययन व मनन साधकों को ईश्वर साक्षात्कार की प्राप्ति करा सकने में पूर्ण सक्षम है | 

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