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978-81-7597-387-9 5e0f2072a380ee192d49cc26 Vivekchoodamani - भाग २ (हिंदी) https://cdn1.storehippo.com/s/5d76112ff04e0a38c1aea158/ms.products/5e0f2072a380ee192d49cc26/images/5e1d93c6b49298281c46365e/5e1d93ba3fad7827dac7f336/webp/5e1d93ba3fad7827dac7f336.jpg

विवेकचूड़ामणि भगवदगीता एवं उपनिषदों का सार है | यह साधक को पुनः शिक्षित करती है तथा व्यवस्थित ढंग से जीवन के विषय में एक नवीन एवं स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करती है | वेदान्त के इस विस्तृत वर्णन में आदि शंकराचार्यजी ने जीवन का लक्ष्य एवं उसे प्राप्त करने की साधना का विस्तार से स्पष्टीकरण किया है | 

विवेकचूड़ामणि का गहन अध्ययन करने वाले साधक को निश्चय ही आत्मविकास के लिए अन्य किसी सहायता की आवश्यकता नहीं है | 

V2002
in stock INR 270
Chinmaya Prakashan
1 1

Vivekchoodamani - भाग २ (हिंदी)

SKU: V2002
₹270
Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 978-81-7597-387-9
Language: Hindi
Author: Swami Chinmayananda
Binding: Paperback
Tags:
  • Spirituality, Spiritual Knowledge, Philosophy, Awakening

Description of product

विवेकचूड़ामणि भगवदगीता एवं उपनिषदों का सार है | यह साधक को पुनः शिक्षित करती है तथा व्यवस्थित ढंग से जीवन के विषय में एक नवीन एवं स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करती है | वेदान्त के इस विस्तृत वर्णन में आदि शंकराचार्यजी ने जीवन का लक्ष्य एवं उसे प्राप्त करने की साधना का विस्तार से स्पष्टीकरण किया है | 

विवेकचूड़ामणि का गहन अध्ययन करने वाले साधक को निश्चय ही आत्मविकास के लिए अन्य किसी सहायता की आवश्यकता नहीं है | 

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