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9788175978119 63786585fa5f6ad36c0402a4 Geeta Tatparya Bodhini (सप्तम अध्याय) //d2pyicwmjx3wii.cloudfront.net/s/5d76112ff04e0a38c1aea158/637af3c51ff2368a559439b4/webp/png-bodhini-copy.png

श्रीमद् भगवद् गीता के सप्तम अध्याय, ज्ञानविज्ञानयोग, पर परम पूज्य स्वामी सुबोधानन्दजी के बोधप्रद प्रवचन|

प्रस्थानत्रयी - श्रीमद् भगवद् गीता, उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र, इस आधारशिला पर सनातन वैदिक धर्म चिरस्थित है| इनमें से श्रीमदभगवद्गीता मानव जीवन के हर स्तर की समस्याओं के समाधान को उजागर करती हुई सभी साधकों को आध्यात्मिक साधना की गहराई को छूने के लिए मार्गदर्शन करती हुई भवद्वेषिणी के रूप में प्रस्तुत है|

इस गीता के तात्पर्य का अवबोधन जगद्-गुरु भगवान श्रीकृष्ण के ह्रदय के साथ तदाकारता हुए बिना बड़ा कठिन है| यह तात्पर्य चिन्मय मिशन सिद्धबाड़ी के ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी सुबोधानन्दजी के प्रवचनों की विद्वत्तापूर्ण शैली से सुज्ञ साधकों को अवगत होता है| पूज्य स्वामीजी के गहन गंभीर चिंतनशील प्रवचनों के संग्रह की सप्तम कड़ी श्रीगुरुतत्व को समर्पित करते हैं|

G2024
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Chinmaya Prakashan
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Geeta Tatparya Bodhini (सप्तम अध्याय)

SKU: G2024
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Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 9788175978119
Language: Hindi
Author: Swami Subodhananda
Binding: PaperBack

Description of product

श्रीमद् भगवद् गीता के सप्तम अध्याय, ज्ञानविज्ञानयोग, पर परम पूज्य स्वामी सुबोधानन्दजी के बोधप्रद प्रवचन|

प्रस्थानत्रयी - श्रीमद् भगवद् गीता, उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र, इस आधारशिला पर सनातन वैदिक धर्म चिरस्थित है| इनमें से श्रीमदभगवद्गीता मानव जीवन के हर स्तर की समस्याओं के समाधान को उजागर करती हुई सभी साधकों को आध्यात्मिक साधना की गहराई को छूने के लिए मार्गदर्शन करती हुई भवद्वेषिणी के रूप में प्रस्तुत है|

इस गीता के तात्पर्य का अवबोधन जगद्-गुरु भगवान श्रीकृष्ण के ह्रदय के साथ तदाकारता हुए बिना बड़ा कठिन है| यह तात्पर्य चिन्मय मिशन सिद्धबाड़ी के ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी सुबोधानन्दजी के प्रवचनों की विद्वत्तापूर्ण शैली से सुज्ञ साधकों को अवगत होता है| पूज्य स्वामीजी के गहन गंभीर चिंतनशील प्रवचनों के संग्रह की सप्तम कड़ी श्रीगुरुतत्व को समर्पित करते हैं|

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