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978-81-7597-345-9 5e0f20c3985d17192cf48ff2 Shrimad Bhagavad Gita - (हिंदी) - Chapter 16 & 17 https://cdn1.storehippo.com/s/5d76112ff04e0a38c1aea158/ms.products/5e0f20c3985d17192cf48ff2/images/5e195f7805570b59eff1f327/5e195f67c7ef1d59f443aad7/webp/5e195f67c7ef1d59f443aad7.png

भगवद गीता के १६वे  अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण पवित्र और जो सुधारी न जा सके ऐसी दोनो प्रकार की जीवात्माओं की बात बिना किसी मूल्यांकन के और बिना किसी व्यतिगत हुए करते है| जहाँ हमारा आंतिरिक सौंदर्य दूसरों का मुस्कान में झलकता है वही हमारी घृणा व् क्रोध जैसी कुवृतिंयों को ढक लेती है हमारे विचारो,व्यवहार, तप और दान में प्रतिबिम्बित होती है|

श्री कृष्ण हमारे विकल्प प्रस्तुत करते है. चुनाव् तो हमें ही करना है|

G2005
in stock INR 35
Chinmaya Prakashan
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Shrimad Bhagavad Gita - (हिंदी) - Chapter 16 & 17

SKU: G2005
₹35
Publisher: Chinmaya Prakashan
ISBN: 978-81-7597-345-9
Language: Hindi
Author: Swami Chinmayananda
Binding: Paperback
Tags:
  • Geeta, Vedanta, Spirituality

Description of product

भगवद गीता के १६वे  अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण पवित्र और जो सुधारी न जा सके ऐसी दोनो प्रकार की जीवात्माओं की बात बिना किसी मूल्यांकन के और बिना किसी व्यतिगत हुए करते है| जहाँ हमारा आंतिरिक सौंदर्य दूसरों का मुस्कान में झलकता है वही हमारी घृणा व् क्रोध जैसी कुवृतिंयों को ढक लेती है हमारे विचारो,व्यवहार, तप और दान में प्रतिबिम्बित होती है|

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